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रिश्वत के खिलाफ निगरानी की दोहरी कार्रवाई, लखीसराय में पंचायती राज पदाधिकारी गिरफ्तार

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | बिहार में निगरानी की दोहरी कार्रवाई, लखीसराय में 28 हजार रुपये लेते पंचायती राज पदाधिकारी गिरफ्तार और पुराने रिश्वत मामले में पूर्व राजस्व कर्मचारी को सजा।

पटना/लखीसराय, 15 सितंबर 2026 | Alam Ki Khabar

बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने मंगलवार को दो अलग-अलग मामलों में कार्रवाई की। एक मामले में लखीसराय जिले में प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी को 28 हजार रुपये की कथित रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। वहीं दूसरे मामले में वर्ष 2015 के रिश्वत प्रकरण में पूर्व राजस्व कर्मचारी को विशेष निगरानी अदालत ने दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है।

नाला निर्माण के भुगतान से जुड़ा था मामला

लखीसराय में निगरानी ब्यूरो की कार्रवाई हलसी प्रखंड में हुई। गिरफ्तार अधिकारी की पहचान ब्रजेश कुमार के रूप में हुई है। वे हलसी के प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी के पद पर तैनात बताए गए हैं और चानन प्रखंड का अतिरिक्त प्रभार भी उनके पास था।

निगरानी के अनुसार, शिकायतकर्ता राम नारायण साव ने नाला निर्माण कार्य के भुगतान से संबंधित मापी पुस्तक भरने के बदले रिश्वत मांगे जाने की शिकायत की थी। शिकायत के सत्यापन में आरोप सही पाए जाने के बाद निगरानी टीम ने ट्रैप की कार्रवाई की।

इसके बाद धावा दल ने कार्यालय कक्ष में कार्रवाई करते हुए ब्रजेश कुमार को 28 हजार रुपये लेते रंगे हाथ पकड़ लिया। कार्रवाई पुलिस उपाधीक्षक रणजीत कुमार निराला के नेतृत्व में गठित टीम ने की।

2015 के रिश्वत मामले में पूर्व राजस्व कर्मचारी दोषी

दूसरी ओर पटना में विशेष न्यायाधीश निगरानी अतुल कुमार सिंह की अदालत ने वर्ष 2015 के रिश्वत मामले में पूर्व राजस्व कर्मचारी अमरेन्द्र कुमार सिन्हा को दोषी करार दिया।

अमरेन्द्र कुमार सिन्हा फुलवारीशरीफ प्रखंड के हल्का संख्या-06 में राजस्व कर्मचारी के पद पर कार्यरत थे। मामला जमीन के नामांतरण के बदले रिश्वत लेने से जुड़ा था। 23 जनवरी 2015 को निगरानी टीम ने कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार किया था।

अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत तीन वर्ष के सश्रम कारावास और 9 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं धारा 13(2) सह पठित धारा 13(1)(डी) के तहत चार वर्ष के सश्रम कारावास और 9 हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया है। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

2026 में 21 मामलों में सजा

निगरानी ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 में अब तक भ्रष्टाचार से जुड़े 21 मामलों में अदालत से सजा सुनाई जा चुकी है। ब्यूरो ने इसे वर्ष 2000 में झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद किसी एक वर्ष में सजा के मामलों की सबसे अधिक संख्या बताया है।

वर्ष 2025 में निगरानी के विशेष न्यायालयों द्वारा कुल 30 मामलों में सजा सुनाई गई थी। निगरानी ब्यूरो की ओर से भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में आगे भी कार्रवाई और अभियोजन जारी रखने की बात कही गई है।

2026 में 108वीं प्राथमिकी, 100वां ट्रैप केस

निगरानी के ताजा आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2026 में भ्रष्टाचार के खिलाफ यह 108वीं प्राथमिकी है। वहीं ट्रैप से संबंधित यह 100वां मामला बताया गया है।

ब्यूरो के अनुसार इन कार्रवाइयों में अब तक 101 आरोपियों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया जा चुका है। इस दौरान रिश्वत के रूप में कुल 36 लाख 94 हजार 800 रुपये की बरामदगी बताई गई है। इसके अलावा 37 हजार रुपये कीमत की एक वॉशिंग मशीन भी बरामद की गई है।

भ्रष्टाचार पर कार्रवाई का सिलसिला जारी

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की लगातार हो रही कार्रवाई से यह साफ है कि सरकारी कामकाज में रिश्वतखोरी के मामलों पर विभाग की नजर बनी हुई है। एक ओर पुराने मामलों में दोषियों को अदालत से सजा दिलाने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर शिकायतों के आधार पर ट्रैप कार्रवाई भी की जा रही है।

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